के. कृष्णमूर्ति: संक्षिप्त परिचय

श्री कमलेश कृष्णमूर्ति एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक चिंतक हैं, जो विभिन्न धार्मिक, वैचारिक, शैक्षणिक तथा समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन कार्य करते रहते हैं।

अर्थशास्त्र में स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात्, श्री कृष्णमूर्ति वर्ष 1989 से ही झारखंड, बिहार और उड़ीसा के अत्यंत पिछड़े व सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक, तकनीकी और सामाजिक पुनरुत्थान के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं।

उन्होंने विकास की मुख्यधारा से दूर और मूलभूत सुविधाओं से वंचित विद्यार्थियों व युवाओं को तकनीकी शिक्षा में प्रशिक्षित करने तथा रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 1997 में कंप्यूटर प्रशिक्षण तथा अंग्रेजी शिक्षण के केंद्र स्थापित किए, जिनसे प्रशिक्षित होकर सैकड़ों युवक-युवतियाँ सरकारी एवं गैर-सरकारी सेवाओं तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

स्वामी विवेकानन्द के अद्वितीय देश-प्रेम और सामाजिक-आध्यात्मिक कार्यों से अनुप्राणित होकर उन्होंने वर्ष 1999 से पूर्णतः जन-सहयोग पर आधारित “स्वामी विवेकानन्द गर्म वस्त्र संग्रह व वितरण अभियान” प्रारंभ किया, जिसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ष सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंदों के बीच खाद्य-सामग्री सहित लाखों कंबल और वस्त्र वितरित किए जाते रहे।

प्रशासनिक एवं संस्थागत उत्तरदायित्व

प्रशासनिक और संस्थागत उत्तरदायित्वों के क्रम में, वर्ष 2002 में केंद्र सरकार के एक उपक्रम ‘कंप्यूटर लिटरेसी मूवमेंट’ में उन्होंने झारखंड राज्य में निदेशक पद का दायित्व निभाया तथा लगभग एक वर्ष तक बिहार राज्य का अतिरिक्त प्रभार संभाला; साथ ही रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक महाविद्यालय में तकनीकी समन्वयक के रूप में लगभग तीन वर्षों तक कार्य किया।

वर्ष 2007 में नौकरी छोड़ने से पूर्व वे अनेक सामाजिक एवं जनसेवी संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे, जिनमें मुख्य रूप से स्वामी विवेकानन्द मिशन, भारतीय चेतना केंद्र तथा भारत शोध जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएँ एवं मंच सम्मिलित हैं।

राष्ट्रीय मुद्दे, भ्रष्टाचार-विरोधी सर्वेक्षण एवं मीडिया योगदान

इसी राष्ट्रव्यापी चेतना और सामाजिक अनुभवों के पश्चात्, वे ‘भारत शोध एवं राष्ट्रीय मुद्दों का नागरिक आयोग’ में सचिव के रूप में उत्तरदायित्व निभा चुके हैं। इस आयोग के नेतृत्व में भारत में पहली बार एक व्यापक भ्रष्टाचार-विरोधी सर्वेक्षण का कार्य किया गया, जिससे देश की अनेक अग्रणी एवं प्रतिष्ठित विभूतियाँ सक्रिय रूप से संबद्ध रहीं।

इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विशिष्ट नाम उल्लेखनीय हैं:

  • न्यायपालिका एवं प्रशासन: न्यायमूर्ति पी.बी. सावंत (पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्णा अय्यर (पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय), श्री पी.के. सिद्धार्थ (लेखक, क्रियावादी एवं सेवानिवृत्त एडीजीपी), डॉ. वाई.पी. आनंद (पूर्व अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड)।

  • विज्ञान एवं शिक्षा: प्रोफेसर यशपाल (प्रख्यात वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद), प्रोफेसर प्रदीप खंडवाला (पूर्व निदेशक, भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद)।

  • कला, खेल एवं मीडिया: पी.टी. उषा (सुप्रसिद्ध धाविका), श्री श्याम बेनेगल (प्रख्यात फिल्म निर्देशक), श्री विद्यानिवास मिश्र (नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक)।

इसके अतिरिक्त न्यायपालिका, प्रशासन, विज्ञान, शिक्षा, साहित्य, कला, media तथा सार्वजनिक जीवन के अनेक अन्य राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी इस आयोग से जुड़े रहे।

इसके साथ ही, उन्होंने ‘भारतीय सुराज मंच’ में केंद्रीय समन्वयक के रूप में भूमिका निभाई तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘खेती से लखपति’ नामक दूरदर्शन फिल्म-श्रृंखला के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया, जिसके 12 एपिसोड दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित हुए।

वर्तमान अभियान: गीता ग्लोबल फैमिली एवं गुरुकुलीय परंपरा

वे वर्तमान में संस्थापक न्यासी के रूप में ‘गीता ग्लोबल फैमिली’ संस्था के माध्यम से भगवद्गीता के विचारों के आलोक में आध्यात्मिक एवं भौतिक गरीबी के निवारण तथा मानव जीवन में संतुलित सुख, शांति और नैतिकता की स्थापना हेतु निरंतर कार्यरत हैं।

श्रीधाम वृंदावन, ऋषिकेश एवं हिमाचल प्रदेश को केंद्र बनाकर वे श्रीयुत ब्रह्मबोधि कृत मोक्षविद्यादायिनी परमपावन भगवद्गीता के विशिष्ट संस्करण के माध्यम से अध्यात्म और विज्ञान के समन्वित दृष्टिकोण को सरल और प्रामाणिक रूप में विश्व के करोड़ों परिवारों तक पहुँचाने के महाभियान में लगे हुए हैं।

इसके साथ ही, भारतीय संस्कृति के उच्च नैतिक आदर्शों की पुनर्स्थापना हेतु ‘सर्वशिक्षा, संपूर्ण शिक्षा, नि:शुल्क शिक्षा’ कार्यक्रम के अंतर्गत वे ‘गीता ग्लोबल गुरुकुल’ के माध्यम से प्राचीन गुरुकुलीय परंपरा को पुनर्जीवित करने में संलग्न हैं।

इस देशव्यापी अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ समालोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking), सृजनात्मकता, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, नैतिक दर्शन तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण जैसे 50 अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों का शिक्षण दिया जा रहा है, जो वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में अधिकांशतः शामिल नहीं हैं।

आधिकारिक संपर्क सूत्र
  • ईमेल: kkrishnamurti09@gmail.com

  • आधिकारिक वेबसाइट: kkrishnamurti.in

👉 https://www.youtube.com/@KrishnamurtiKOfficial

✍️ के. कृष्णमूर्ति श्रीधाम वृंदावन

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