जब तीरà¥à¤¥ की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पर पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ उठने लगें, तब हमें केवल धाम को नहीं, सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को à¤à¥€ देखने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
विशà¥à¤µ का आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• केंदà¥à¤°, à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ की दिवà¥à¤¯ लीला-à¤à¥‚मि—शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन—केवल à¤à¤• तीरà¥à¤¥ नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आसà¥à¤¥à¤¾, शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• चेतना का केंदà¥à¤° है।
सदियों से संत, साधक, à¤à¤•à¥à¤¤ और जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ इस पावन धाम की ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होते रहे हैं। यहाठआने वाला केवल किसी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ का दरà¥à¤¶à¤¨ नहीं करता, बलà¥à¤•ि उस à¤à¤¾à¤µ को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है जिसने à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ की लीलाओं को अमर बना दिया।
परंतॠआज à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से हमारे सामने खड़ा है। कà¥à¤¯à¤¾ हम शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन को उसी à¤à¤¾à¤µ से देख रहे हैं, जिस à¤à¤¾à¤µ से हमारे पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ ने देखा था? कà¥à¤¯à¤¾ हम यहाठशà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ बनकर आ रहे हैं, या केवल दरà¥à¤¶à¤• बनकर? कà¥à¤¯à¤¾ हम धाम की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ को समà¤à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर रहे हैं, या अपनी पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को ही यहाठलेकर आ रहे हैं?
शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन की आतà¥à¤®à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ है?
शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन की आतà¥à¤®à¤¾ à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ का वह पà¥à¤°à¥‡à¤® है जो गौ माता, बà¥à¤°à¤œà¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और समसà¥à¤¤ सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤†à¥¤ बà¥à¤°à¤œ की संसà¥à¤•ृति का आधार सरलता, सेवा, विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾ और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ है। यही कारण है कि बà¥à¤°à¤œ केवल à¤à¤• à¤à¥Œà¤—ोलिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• जीवंत आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤à¥‚ति है।
शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत महापà¥à¤°à¤¾à¤£ में à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ की बà¥à¤°à¤œ-लीलाओं का वरà¥à¤£à¤¨ केवल कथा के रूप में नहीं, बलà¥à¤•ि पà¥à¤°à¥‡à¤®, समरà¥à¤ªà¤£ और ईशà¥à¤µà¤° के साथ जीव के संबंध के सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š आदरà¥à¤¶ के रूप में किया गया है।
इसलिठजो à¤à¥€ इस धाम में आà¤, उसके à¤à¥€à¤¤à¤° शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾, संवेदनशीलता और समà¥à¤®à¤¾à¤¨ का à¤à¤¾à¤µ होना चाहिà¤à¥¤ धाम केवल देखने की वसà¥à¤¤à¥ नहीं है; धाम à¤à¤• साधना है, à¤à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ है, à¤à¤• जीवन-पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ है।
जब तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ में बदलने लगे
यदि हम ईमानदारी से आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन करें, तो सà¥à¤µà¥€à¤•ार करना होगा कि आज अनेक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ की अपेकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ अधिक दिखाई देता है। तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾ की अपेकà¥à¤·à¤¾ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ का à¤à¤¾à¤µ बढ़ता हà¥à¤† दिखाई देता है। दरà¥à¤¶à¤¨ की अपेकà¥à¤·à¤¾ दृशà¥à¤¯ अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होते जा रहे हैं।
जब किसी धाम को केवल मनोरंजन, उपà¤à¥‹à¤— या वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त आकरà¥à¤·à¤£ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से देखा जाने लगता है, तब उसकी बाहरी चहल-पहल à¤à¤²à¥‡ बढ़ जाà¤, पर उसकी आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गरिमा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने लगती है। समसà¥à¤¯à¤¾ केवल वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की नहीं है; समसà¥à¤¯à¤¾ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ की à¤à¥€ है।
वासà¥à¤¤à¤µ में पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ यह नहीं है कि वृंदावन बदल रहा है। पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ यह है कि कà¥à¤¯à¤¾ हमारी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ à¤à¥€ बदल रही है?
आचरण ही तीरà¥à¤¥ की वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• पहचान है
इससे à¤à¥€ अधिक चिंता तब होती है जब समाज का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ करने वाले वरà¥à¤—ों में ही चरितà¥à¤°, आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•ता और नैतिकता की दà¥à¤°à¥à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ दिखाई देने लगे। किसी à¤à¥€ तीरà¥à¤¥ की वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• महिमा उसके à¤à¤µà¤¨à¥‹à¤‚, मारà¥à¤—ों और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं से नहीं, बलà¥à¤•ि वहाठके आचरण से जीवित रहती है।
संत समाज, बà¥à¤°à¤œà¤µà¤¾à¤¸à¥€ और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥â€”सà¤à¥€ मिलकर धाम की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ को जीवित रखते हैं। यदि आचरण कमजोर हो जाà¤, तो दिवà¥à¤¯à¤¤à¤¾ केवल चरà¥à¤šà¤¾ का विषय बनकर रह जाती है।
à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¤—वदà¥à¤—ीता में कहते हैं—
“देवदà¥à¤µà¤¿à¤œà¤—à¥à¤°à¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤žà¤ªà¥‚जनं शौचमारà¥à¤œà¤µà¤®à¥à¥¤ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤šà¤°à¥à¤¯à¤®à¤¹à¤¿à¤‚सा च शारीरं तप उचà¥à¤¯à¤¤à¥‡à¥¥â€ — à¤à¤—वदà¥à¤—ीता 17.14
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ — देवता, विदà¥à¤µà¤¾à¤¨, गà¥à¤°à¥ और पूजनीय जनों का समà¥à¤®à¤¾à¤¨, शà¥à¤šà¤¿à¤¤à¤¾, सरलता और संयम—ये सब शारीरिक तप हैं।
यह शà¥à¤²à¥‹à¤• हमें सà¥à¤®à¤°à¤£ कराता है कि आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•ता केवल पूजा-पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ का विषय नहीं है; यह जीवन के आचरण का विषय à¤à¥€ है।
समसà¥à¤¯à¤¾ केवल शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन की नहीं है
यदि नई पीढ़ी धाम को केवल परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ सà¥à¤¥à¤² की तरह देख रही है, तो उसका कारण केवल यà¥à¤µà¤¾ नहीं हैं। हमें परिवार, शिकà¥à¤·à¤¾, समाज और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• नेतृतà¥à¤µâ€”सà¤à¥€ की à¤à¥‚मिका पर विचार करना होगा।
आज शिकà¥à¤·à¤¾ का केंदà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ जीविका बन गया है, जबकि जीवन-मूलà¥à¤¯ पीछे छूटते जा रहे हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आधà¥à¤¨à¤¿à¤• जà¥à¤žà¤¾à¤¨ अवशà¥à¤¯ मिलना चाहिà¤, पर साथ ही यह à¤à¥€ समà¤à¤¨à¤¾ आवशà¥à¤¯à¤• है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सांसà¥à¤•ृतिक और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• विरासत कà¥à¤¯à¤¾ है, तीरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का महतà¥à¤µ कà¥à¤¯à¤¾ है, और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ का वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• अरà¥à¤¥ कà¥à¤¯à¤¾ है।
समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान केवल नियमों और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚धों से नहीं होगा। वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• परिवरà¥à¤¤à¤¨ तब होगा जब दृषà¥à¤Ÿà¤¿ बदलेगी। जब परिवार संसà¥à¤•ार देंगे, शिकà¥à¤·à¤¾ चरितà¥à¤° निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करेगी, संत समाज आदरà¥à¤¶ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करेगा और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ का अनà¥à¤à¤µ करेंगे, तब परिवरà¥à¤¤à¤¨ सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ दिखाई देगा।
वरà¥à¤¥à¤¿à¤¨à¥€ à¤à¤•ादशी का वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• संदेश
आज वरà¥à¤¥à¤¿à¤¨à¥€ à¤à¤•ादशी का पावन अवसर है। ‘वरà¥à¤¥à¤¿à¤¨à¥€’ का अरà¥à¤¥ है—रकà¥à¤·à¤¾ करने वाली। यह केवल बाहरी सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ का नहीं, बलà¥à¤•ि धरà¥à¤®, मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾, संसà¥à¤•ार और विवेक की रकà¥à¤·à¤¾ का à¤à¥€ संदेश देती है।
इस पवितà¥à¤° अवसर पर ठाकà¥à¤° शà¥à¤°à¥€ बांके बिहारी लाल जी महाराज के चरणों में यही पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ है कि वे हम सà¤à¥€ को à¤à¤¸à¤¾ विवेक पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करें, जिससे हम शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन की पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾, उसकी मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और उसकी आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• चेतना को समठसकें। हम केवल धाम का दरà¥à¤¶à¤¨ ही न करें, बलà¥à¤•ि धाम के अनà¥à¤°à¥‚प अपने जीवन को à¤à¥€ बनाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें।
धाम की रकà¥à¤·à¤¾ पहले दृषà¥à¤Ÿà¤¿ की रकà¥à¤·à¤¾ से होगी
वासà¥à¤¤à¤µ में यह केवल शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन का पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ नहीं है। यह उस दृषà¥à¤Ÿà¤¿ का पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ है, जिससे हम धरà¥à¤® को देखते हैं; उस चेतना का पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ है, जिससे हम जीवन को जीते हैं; और उस उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ का पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ है, जिसे हम आने वाली पीढ़ियों के लिठछोड़कर जाना चाहते हैं।
यदि हम अपनी दृषà¥à¤Ÿà¤¿ को शà¥à¤¦à¥à¤§ कर लें, तो धाम की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ की रकà¥à¤·à¤¾ का मारà¥à¤— à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ हो जाà¤à¤—ा। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि किसी à¤à¥€ तीरà¥à¤¥ की रकà¥à¤·à¤¾ केवल उसके à¤à¤µà¤¨à¥‹à¤‚, मारà¥à¤—ों और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं से नहीं होती; उसकी रकà¥à¤·à¤¾ उसके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾, समà¥à¤®à¤¾à¤¨ और उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ के à¤à¤¾à¤µ से होती है।
साधà¥-संतों का उचà¥à¤š आचरण, बà¥à¤°à¤œà¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सेवा-à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की विनमà¥à¤° निषà¥à¤ ा ही मिलकर शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन को शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन बनाती है।
आइà¤, हम सब आतà¥à¤®à¤®à¤‚थन करें। दूसरों से पहले सà¥à¤µà¤¯à¤‚ से पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पूछें। यदि धाम की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हमें पà¥à¤°à¤¿à¤¯ है, तो हमें अपने जीवन में à¤à¥€ उन मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ देना होगा जिनके कारण यह à¤à¥‚मि यà¥à¤—ों से पूजनीय रही है।
पाठकों हेतॠआतà¥à¤®à¥€à¤¯ संदेश
🌎 यदि यह संदेश आपके à¤à¥€à¤¤à¤° सतà¥à¤¯, विवेक और आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन का à¤à¤¾à¤µ जगा सके, तो इसे केवल पढ़कर न छोड़ें—इसे जीवन में उतारने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। à¤à¤¸à¥‡ विचारों, अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ और संवाद से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहना आवशà¥à¤¯à¤• है, जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ को उसके जीवन-मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚, संसà¥à¤•ारों और सतà¥à¤¯ मारà¥à¤— से जोड़ते हैं।
नितà¥à¤¯ à¤à¤—वदà¥à¤—ीता पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤°à¥€, जीवन-दरà¥à¤¶à¤¨, चरितà¥à¤°-निरà¥à¤®à¤¾à¤£, आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• चिंतन तथा समसामयिक विषयों पर नियमित अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨-सामगà¥à¤°à¥€ के लिà¤:
👉 https://www.youtube.com/@KrishnamurtiKOfficial
âœï¸ के. कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿, शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन
कॉपीराइट à¤à¤µà¤‚ बौदà¥à¤§à¤¿à¤• संपदा संरकà¥à¤·à¤£
© 2026 K. Krishnamurti. All Rights Reserved.
यह आलेख लेखक के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨, शोध, जीवनानà¥à¤à¤µ à¤à¤µà¤‚ वैचारिक चिंतन की मौलिक अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ है तथा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अंतरà¥à¤—त संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ बौदà¥à¤§à¤¿à¤• संपदा है।
लेखक की पूरà¥à¤µ लिखित अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ के बिना किसी à¤à¥€ समाचारपतà¥à¤°, पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा, वेबसाइट, बà¥à¤²à¥‰à¤—, डिजिटल पोरà¥à¤Ÿà¤², सोशल मीडिया मंच अथवा अनà¥à¤¯ माधà¥à¤¯à¤® दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इस सामगà¥à¤°à¥€ का पà¥à¤¨à¤°à¥à¤ªà¥à¤°à¤•ाशन, संपादन, अनà¥à¤µà¤¾à¤¦, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤²à¤¿à¤ªà¤¿, वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• उपयोग, डिजिटल पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤°à¤£ या AI पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ हेतॠउपयोग अनà¥à¤®à¤¤ नहीं है।
इस सामगà¥à¤°à¥€ का कोई à¤à¥€ अनधिकृत उपयोग लेखक के बौदà¥à¤§à¤¿à¤• अधिकारों का उलà¥à¤²à¤‚घन माना जाà¤à¤—ा, जिसके संबंध में सà¤à¥€ विधिक अधिकार सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हैं।
Original Author: K. Krishnamurti Official Website: kkrishnamurti.in