कà¥à¤¯à¤¾ सचमà¥à¤š à¤à¤¸à¤¾ कोई उपाय है, जिससे जीवन में कोई à¤à¥€ हमसे अपà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ न हो?
यदि यह संà¤à¤µ है, तो उसका आधार बाहर नहीं — हमारे à¤à¥€à¤¤à¤° है।
कà¥à¤¯à¤¾ मनà¥à¤·à¥à¤¯ अपने जीवन में अपने मितà¥à¤°, बंधà¥, पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€, परिवार और समाज—सà¤à¥€ को सदा पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ रख सकता है? यह पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ अतà¥à¤¯à¤‚त गहरा और विचारणीय है। जब हम इस पर शांत मन से आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन करते हैं, तो à¤à¤• सरल सतà¥à¤¯ सामने आता है—जब तक किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ हमसे पूरà¥à¤£ होता रहता है, तब तक वह हमारे साथ मधà¥à¤° वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° करता है; परंतॠजैसे ही उसका सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ समापà¥à¤¤ होता है, या हम देने योगà¥à¤¯ नहीं रहते, वही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अपà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ या नाराज हो जाता है।
और यह à¤à¥€ à¤à¤• सूकà¥à¤·à¥à¤® सतà¥à¤¯ है कि नाराज होने वाले बाहर के लोग नहीं होते, बलà¥à¤•ि वही होते हैं जो हमारे अतà¥à¤¯à¤‚त निकट और पà¥à¤°à¤¿à¤¯ होते हैं। यह अनà¥à¤à¤µ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ के जीवन में किसी-न-किसी रूप में अवशà¥à¤¯ घटित होता है। इसलिठकेवल सबको पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करना सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ समाधान नहीं हो सकता।
इसीलिठशासà¥à¤¤à¥à¤° हमें à¤à¤• उचà¥à¤š और शाशà¥à¤µà¤¤ मारà¥à¤— की ओर ले जाते हैं। शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत (आठवाठसà¥à¤•ंध) का यह अदà¥à¤à¥à¤¤ शà¥à¤²à¥‹à¤• जीवन का सरल, परंतॠगहन रहसà¥à¤¯ खोलता है—
“पà¥à¤‚सः कृपयतो à¤à¤¦à¥à¤°à¥‡ सरà¥à¤µà¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¾ पà¥à¤°à¥€à¤¯à¤¤à¥‡ हरिः।
पà¥à¤°à¥€à¤¤à¥‡ हरौ à¤à¤—वति पà¥à¤°à¥€à¤¯à¥‡à¤½à¤¹à¤‚ सचराचरः॥â€
(शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत पà¥à¤°à¤¾à¤£ 8.7.40)
à¤à¤—वान शिव माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ से कहते हैं—
हे à¤à¤¦à¥à¤°à¥‡! जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ सबके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ कृपा और करà¥à¤£à¤¾ का à¤à¤¾à¤µ रखता है, उससे सà¤à¥€ के हृदय में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤¹à¤°à¤¿ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हो जाते हैं। और जब à¤à¤—वान पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होते हैं, तब यह समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ चर-अचर जगत à¤à¥€ उससे पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हो उठता है।
इस शà¥à¤²à¥‹à¤• का à¤à¤¾à¤µ हमें à¤à¤• अतà¥à¤¯à¤‚त सरल, परंतॠदिवà¥à¤¯ दिशा पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है—मनà¥à¤·à¥à¤¯ को सबको पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं करना चाहिà¤, बलà¥à¤•ि अपने à¤à¥€à¤¤à¤° दया, करà¥à¤£à¤¾ और शà¥à¤à¤à¤¾à¤µ को विकसित करना चाहिà¤à¥¤ यही वह à¤à¤¾à¤µ है जो à¤à¤—वान को पà¥à¤°à¤¿à¤¯ है।
जब मनà¥à¤·à¥à¤¯ इस à¤à¤¾à¤µ के साथ जीवन जीता है, तब उसके à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• सहज शांति और संतà¥à¤²à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है। उसका वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°, उसका दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण और उसकी उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ ही à¤à¤¸à¥€ हो जाती है कि संबंधों में मधà¥à¤°à¤¤à¤¾ सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ आने लगती है।
अतः शासà¥à¤¤à¥à¤° का यह दिवà¥à¤¯ संदेश अतà¥à¤¯à¤‚त सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है—
हरि को पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जब à¤à¤—वान पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होते हैं, तब जीवन में समरसता और संतà¥à¤²à¤¨ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ पà¥à¤°à¤•ट हो जाता है।
🌎 यदि यह लेख आपके à¤à¥€à¤¤à¤° चिंतन और जागरण की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करता है, तो आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•, सामाजिक और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• लेखों के माधà¥à¤¯à¤® से राषà¥à¤Ÿà¥à¤°, संसà¥à¤•ृति, धरà¥à¤®, शिकà¥à¤·à¤¾ और चरितà¥à¤°-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के इस सतत चिंतन से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡à¤‚ तथा नितà¥à¤¯ à¤à¤—वदà¥à¤—ीता पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤°à¥€ में सहà¤à¤¾à¤—ी बनें —
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