कà¥à¤¯à¤¾ मनà¥à¤·à¥à¤¯ धीरे-धीरे अपने शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ मानव जीवन का मूलà¥à¤¯ à¤à¥‚लता जा रहा है…? | सनातन शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से दूरी और à¤à¤Ÿà¤•ती पीढ़ी पर गंà¤à¥€à¤° चिंतन
(चौरासी लाख योनियों की लंबी यातà¥à¤°à¤¾ के बाद मिला यह दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मानव जीवन आखिर किस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के लिठहै? जानिठकैसे अपने सनातन शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से दूर होकर आज का मनà¥à¤·à¥à¤¯ बाहर से जितना आधà¥à¤¨à¤¿à¤• दिख रहा है, à¤à¥€à¤¤à¤° से उतना ही खोखला, à¤à¤¯à¤à¥€à¤¤ और दिशाहीन होता जा रहा है।) आधà¥à¤¨à¤¿à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ और à¤à¥‚लता हà¥à¤† वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• […]
शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन—दिवà¥à¤¯à¤¤à¤¾ की à¤à¥‚मि या हमारी चेतना की परीकà¥à¤·à¤¾?
जब तीरà¥à¤¥ की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पर पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ उठने लगें, तब हमें केवल धाम को नहीं, सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को à¤à¥€ देखने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। विशà¥à¤µ का आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• केंदà¥à¤°, à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ की दिवà¥à¤¯ लीला-à¤à¥‚मि—शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन—केवल à¤à¤• तीरà¥à¤¥ नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आसà¥à¤¥à¤¾, शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• चेतना का केंदà¥à¤° है। सदियों से संत, साधक, à¤à¤•à¥à¤¤ और जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ […]
कà¥à¤¯à¤¾ हर शà¥à¤µà¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥€ हरि के सà¥à¤®à¤°à¤£ से जà¥à¤¡à¤¼ सकती है?
कà¥à¤¯à¤¾ हर शà¥à¤µà¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥€ हरि के सà¥à¤®à¤°à¤£ से जà¥à¤¡à¤¼ सकती है? जब जीवन का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• करà¥à¤® à¤à¤—वान को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हो जाता है, तब à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ सहज हो जाती है। à¤à¤—वदà¥à¤—ीता का यही सरल संदेश है— “यतà¥à¤•रोषि यदशà¥à¤¨à¤¾à¤¸à¤¿ यजà¥à¤œà¥à¤¹à¥‹à¤·à¤¿ ददासि यतà¥à¥¤à¤¯à¤¤à¥à¤¤à¤ªà¤¸à¥à¤¯à¤¸à¤¿ कौनà¥à¤¤à¥‡à¤¯ ततà¥à¤•à¥à¤°à¥à¤·à¥à¤µ मदरà¥à¤ªà¤£à¤®à¥à¥¥â€ (9.27) अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤â€”जो कà¥à¤› à¤à¥€ हम करें, उसे ईशà¥à¤µà¤° को अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दें—यही जीवन […]
शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन की पावन धरती पर सवाल: कà¥à¤¯à¤¾ बà¥à¤°à¤œ की लीला-à¤à¥‚मि मनोरंजन का मंच बनेगी?
✠के. कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿, शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृनà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤¨ शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृंदावन—यह नाम मातà¥à¤° उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ नहीं है, यह à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ चेतना का à¤à¤• जीवंत मंतà¥à¤° है। यह वही पावन बà¥à¤°à¤œ-à¤à¥‚मि है जहाठपरबà¥à¤°à¤¹à¥à¤® परमेशà¥à¤µà¤° शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने अपने साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ चरणों से धरती को सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ किया, जहाठकी वायà¥, कण-कण और रज में आज à¤à¥€ उनकी लीला-सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। यह à¤à¥‚मि केवल à¤à¤• […]
लोगों को नहीं, शà¥à¤°à¥€à¤¹à¤°à¤¿ को पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करें
कà¥à¤¯à¤¾ सचमà¥à¤š à¤à¤¸à¤¾ कोई उपाय है, जिससे जीवन में कोई à¤à¥€ हमसे अपà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ न हो?यदि यह संà¤à¤µ है, तो उसका आधार बाहर नहीं — हमारे à¤à¥€à¤¤à¤° है। कà¥à¤¯à¤¾ मनà¥à¤·à¥à¤¯ अपने जीवन में अपने मितà¥à¤°, बंधà¥, पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€, परिवार और समाज—सà¤à¥€ को सदा पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ रख सकता है? यह पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ अतà¥à¤¯à¤‚त गहरा और विचारणीय है। जब हम इस […]