(चौरासी लाख योनियों की लंबी यातà¥à¤°à¤¾ के बाद मिला यह दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मानव जीवन आखिर किस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के लिठहै? जानिठकैसे अपने सनातन शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से दूर होकर आज का मनà¥à¤·à¥à¤¯ बाहर से जितना आधà¥à¤¨à¤¿à¤• दिख रहा है, à¤à¥€à¤¤à¤° से उतना ही खोखला, à¤à¤¯à¤à¥€à¤¤ और दिशाहीन होता जा रहा है।)
आधà¥à¤¨à¤¿à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ और à¤à¥‚लता हà¥à¤† वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯
कà¥à¤¯à¤¾ वासà¥à¤¤à¤µ में आज के आधà¥à¤¨à¤¿à¤• मनà¥à¤·à¥à¤¯ को यह सà¥à¤®à¤°à¤£ रह गया है कि इस धरती पर उसे सबसे शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ चेतना और दà¥à¤°à¥à¤²à¤ जीवन पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤† है…? या फिर आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता, à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤•ता और à¤à¥‚ठे दिखावे की अंधी दौड़ में वह धीरे-धीरे अपने ही वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• सà¥à¤µà¤°à¥‚प, अपने महान संसà¥à¤•ार और जीवन के परम उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से बहà¥à¤¤ दूर होता जा रहा है?
इस धरती का सबसे विकसित, संवेदनशील और चेतनशील जीव केवल मनà¥à¤·à¥à¤¯ है। परमातà¥à¤®à¤¾ ने संपूरà¥à¤£ चराचर जगत में केवल मनà¥à¤·à¥à¤¯ को ही वह ‘विवेक’ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है, जिससे वह सतà¥à¤¯ और असतà¥à¤¯, धरà¥à¤® और अधरà¥à¤®, उचित और अनà¥à¤šà¤¿à¤¤, तथा करà¥à¤£à¤¾ और कà¥à¤°à¥‚रता के बीच का अंतर समठसके।
पशॠऔर पकà¥à¤·à¥€ केवल अपनी मूल पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ (आहार, निदà¥à¤°à¤¾, à¤à¤¯ और मैथà¥à¤¨) के अधीन होकर जीवन जीते हैं; उनके पास अपने करà¥à¤®à¥‹à¤‚ को चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ या बदलने की सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ नहीं है। केवल मनà¥à¤·à¥à¤¯ ही वह पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ है जो अपने करà¥à¤®à¥‹à¤‚ का निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ है। यही कारण है कि मानव जीवन को सà¤à¥€ योनियों में सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ और मà¥à¤•à¥à¤Ÿà¤®à¤£à¤¿ माना गया है।
परंतॠआज हर विचारशील वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के सामने सबसे बड़ा पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ यही खड़ा होता है कि यदि मनà¥à¤·à¥à¤¯ वासà¥à¤¤à¤µ में इतना शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ और विवेकी है, तो फिर हमारी वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ मानवीय सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ दिन-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¥€à¤¤à¤° से इतनी कमजोर, हिंसक, असà¥à¤¥à¤¿à¤° और दिशाहीन कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती जा रही है?
चौरासी लाख योनियों का गहरा संकेत
हमारी सनातन जà¥à¤žà¤¾à¤¨ परंपरा और शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ उलà¥à¤²à¥‡à¤– मिलता है कि चौरासी लाख योनियों के सà¥à¤¦à¥€à¤°à¥à¤˜ à¤à¤Ÿà¤•ाव और संघरà¥à¤· के बाद यह मानव जीवन पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है।
आधà¥à¤¨à¤¿à¤• यà¥à¤— में सतही चिंतन करने वाले अनेक लोग इस विषय पर अलग-अलग मत रख सकते हैं, पर जब हम इस सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के रहसà¥à¤¯ को दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• और वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• गहराई से देखते हैं, तो यह संकेत अतà¥à¤¯à¤‚त गहरा पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होता है।
जलचर, थलचर, पकà¥à¤·à¥€, वृकà¥à¤·, वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤, सूकà¥à¤·à¥à¤® जीव और अनगिनत पà¥à¤°à¤•ार की जीवन-शृंखलाà¤à¤ — यह समसà¥à¤¤ सृषà¥à¤Ÿà¤¿ इस बात का साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ अनà¥à¤à¤µ कराती है कि मानव जीवन केवल à¤à¤• साधारण जैविक घटना नहीं है, बलà¥à¤•ि यह चेतना के कà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• विकास की अतà¥à¤¯à¤‚त उचà¥à¤š और अंतिम अवसà¥à¤¥à¤¾ है।
पदà¥à¤® पà¥à¤°à¤¾à¤£ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ वरà¥à¤£à¤¨
“जलजा नव-लकà¥à¤·à¤¾à¤£à¤¿ सà¥à¤¥à¤¾à¤µà¤°à¤¾ लकà¥à¤·-विंशति।
कृमयो रà¥à¤¦à¥à¤°-संखà¥à¤¯à¤•ाः पकà¥à¤·à¤¿à¤£à¤¾à¤‚ दश-लकà¥à¤·à¤£à¤®à¥à¥¥
तà¥à¤°à¤¿à¤‚शलà¥à¤²à¤•à¥à¤·à¤¾à¤£à¤¿ पशवः चतà¥à¤°à¥-लकà¥à¤·à¤¾à¤£à¤¿ मानवाः॥â€
(पदà¥à¤® पà¥à¤°à¤¾à¤£, उतà¥à¤¤à¤° खणà¥à¤¡, अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ 229, शà¥à¤²à¥‹à¤• 40–41)
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ — जलचर (जल में रहने वाले जीव) नौ लाख, सà¥à¤¥à¤¾à¤µà¤° (पेड़-पौधे आदि) बीस लाख, कृमि-कीट (कीड़े-मकोड़े) गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹ लाख, पकà¥à¤·à¥€ दस लाख, पशॠतीस लाख और मानव चार लाख पà¥à¤°à¤•ार के बताठगठहैं।
यह वरà¥à¤£à¤¨ केवल जातियों या पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾ का गणितीय विवरण मातà¥à¤° नहीं है। यह इस बात का अतà¥à¤¯à¤‚त गंà¤à¥€à¤° संकेत à¤à¥€ है कि à¤à¤• आतà¥à¤®à¤¾ को जलचर से लेकर पशॠयोनि तक कितना लंबा और अंधकारमय पथ तय करना पड़ता है।
इतने लंबे संघरà¥à¤· के बाद पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होने वाला यह मानव जीवन अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤²à¤ और चेतना की à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अवसà¥à¤¥à¤¾ है। यदि इसे केवल धन कमाने, खाने-पीने और सोने में नषà¥à¤Ÿ कर दिया जाà¤, तो इससे बड़ा दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और कोई नहीं हो सकता।
à¤à¤—वदà¥à¤—ीता का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ संदेश
“उदà¥à¤§à¤°à¥‡à¤¦à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¨à¤¾à¤½à¤¤à¥à¤®à¤¾à¤¨à¤‚ नातà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤®à¤µà¤¸à¤¾à¤¦à¤¯à¥‡à¤¤à¥à¥¤
आतà¥à¤®à¥ˆà¤µ हà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¨à¥‹ बनà¥à¤§à¥à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤®à¥ˆà¤µ रिपà¥à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¨à¤ƒà¥¥â€
(à¤à¤—वदà¥à¤—ीता 6.5)
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ — मनà¥à¤·à¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ (अपने विवेक और पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ से) अपना उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ करे, सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को कà¤à¥€ अधोगति या पतन में न डाले। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मनà¥à¤·à¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही अपना सबसे बड़ा मितà¥à¤° है और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही अपना सबसे बड़ा शतà¥à¤°à¥ à¤à¥€ है।
शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत का हृदयसà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¥€ संदेश
“लबà¥à¤§à¥à¤µà¤¾ सà¥à¤¦à¥à¤°à¥à¤²à¤à¤®à¤¿à¤¦à¤‚ बहà¥à¤¸à¤‚à¤à¤µà¤¾à¤¨à¥à¤¤à¥‡
मानà¥à¤·à¥à¤¯à¤®à¤°à¥à¤¥à¤¦à¤®à¤¨à¤¿à¤¤à¥à¤¯à¤®à¤ªà¥€à¤¹ धीरः।
तूरà¥à¤£à¤‚ यतेत न पतेदनà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¥à¤¯à¥ यावनà¥-
निःशà¥à¤°à¥‡à¤¯à¤¸à¤¾à¤¯ विषयः खलॠसरà¥à¤µà¤¤à¤ƒ सà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¥¥â€
(शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत महापà¥à¤°à¤¾à¤£, सà¥à¤•नà¥à¤§ 11, अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ 9, शà¥à¤²à¥‹à¤• 29)
अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ — अनेक जनà¥à¤®à¥‹à¤‚ के à¤à¤Ÿà¤•ाव के बाद पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ यह मानव जीवन अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤²à¤ और कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤•ारी है। यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ यह जीवन सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ नहीं है (मृतà¥à¤¯à¥ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ है), फिर à¤à¥€ à¤à¤• बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ मनà¥à¤·à¥à¤¯ को मृतà¥à¤¯à¥ आने से पहले अपने इस बहà¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯ जीवन को सतà¥à¤¯ की खोज, आतà¥à¤®à¤•लà¥à¤¯à¤¾à¤£ और शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ मारà¥à¤— में लगाने का ततà¥à¤•ाल पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिà¤à¥¤
आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता के बीच à¤à¥€à¤¤à¤° से टूटता हà¥à¤† मनà¥à¤·à¥à¤¯
यही मानव जीवन का सबसे बड़ा सतà¥à¤¯ है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ चाहे तो अपने विवेक, सनातन संसà¥à¤•ार और उचà¥à¤š चेतना से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को देवतà¥à¤µ की उचà¥à¤šà¤¤à¤® अवसà¥à¤¥à¤¾ तक पहà¥à¤à¤šà¤¾ सकता है, और चाहे तो अपने ही निकृषà¥à¤Ÿ करà¥à¤®à¥‹à¤‚ और अहंकार से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• पतन की ओर à¤à¥€ ले जा सकता है।
आज समाज के पà¥à¤°à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§ वरà¥à¤— के लिठसबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इतना महान और दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मानव जीवन पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होने के बाद à¤à¥€, आज का मनà¥à¤·à¥à¤¯ अपने जीवन के मूल उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से पूरी तरह à¤à¤Ÿà¤•ता जा रहा है।
बाहर से देखने पर विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, तकनीक, चिकितà¥à¤¸à¤¾ और सà¥à¤–-सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤à¤ बहà¥à¤¤ तेजी से बढ़ रही हैं, पर à¤à¥€à¤¤à¤° से मनà¥à¤·à¥à¤¯ उतना ही असà¥à¤¥à¤¿à¤°, तनावगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ और अवसाद से घिरा हà¥à¤† होता जा रहा है।
सनातन शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से बढ़ती दूरी
इस à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का à¤à¤• सबसे बड़ा और मूल कारण यह है कि धीरे-धीरे हमारे घरों, परिवारों और विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ से हमारे सनातन शासà¥à¤¤à¥à¤° दूर होते जा रहे हैं।
à¤à¤—वदà¥à¤—ीता, रामचरितमानस, उपनिषद और शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वत महापà¥à¤°à¤¾à¤£ जैसे महान दिवà¥à¤¯ गà¥à¤°à¤‚थ, जो कà¤à¥€ हमारे दैनिक जीवन-निरà¥à¤®à¤¾à¤£, चरितà¥à¤°, संकट के समय धैरà¥à¤¯, विवेक और आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन का सबसे बड़ा आधार हà¥à¤† करते थे; आज दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से अनेक घरों में केवल लाल कपड़े में बंधकर पूजा-घर की अलमारी तक सीमित होकर रह गठहैं।
उनका सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ बंद हो गया है।
धरà¥à¤® के नाम पर बढ़ता बाहरी पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨
यह à¤à¥€ à¤à¤• बड़ा दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ है कि आज धरà¥à¤® और अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में à¤à¥€ आंतरिक पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ से अधिक बाहरी पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ हावी दिखाई दे रहा है।
वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ चिंतन, गहरा आतà¥à¤®à¤®à¤‚थन और जीवन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करने वाला सचà¥à¤šà¤¾ सतà¥à¤¸à¤‚ग धीरे-धीरे लà¥à¤ªà¥à¤¤ होता जा रहा है।
आज समाज का à¤à¤• बड़ा वरà¥à¤— केवल à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¥€à¤¡à¤¼, वेशà¤à¥‚षा, चमतà¥à¤•ार और बाहरी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को ही अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® समà¤à¤¨à¥‡ की à¤à¥‚ल कर रहा है।
आने वाली पीढ़ियों के सामने सबसे बड़ा संकट
विचार कीजिà¤, यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को केवल गलाकाट पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िता, उपà¤à¥‹à¤— की लालसा, मशीनें और बाहरी आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता ही सौंपेंगे, पर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जीवन के शाशà¥à¤µà¤¤ सतà¥à¤¯, सनातन संसà¥à¤•ार, बड़ों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ कृतजà¥à¤žà¤¤à¤¾ और आतà¥à¤®à¤¿à¤• चेतना से नहीं जोड़ेंगे, तो हमारा यह समाज बाहर से कितना à¤à¥€ विकसित कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो जाà¤, à¤à¥€à¤¤à¤° से वह पूरी तरह खोखला और मृतपà¥à¤°à¤¾à¤¯ हो जाà¤à¤—ा।
समाधान कà¥à¤¯à¤¾ है?
आज हमें आधà¥à¤¨à¤¿à¤• विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ या तकनीक के किसी अंध-विरोध की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं है, बलà¥à¤•ि सतà¥à¤¯ को सतà¥à¤¯ की तरह बेबाकी से सà¥à¤µà¥€à¤•ार करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
आज की सबसे बड़ी माà¤à¤— अपनी मूल सनातन संसà¥à¤•ृति, अपने शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ और अपने शाशà¥à¤µà¤¤ जीवन मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की ओर पà¥à¤¨à¤ƒ लौटने की है।
आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन का समय अà¤à¥€ à¤à¥€ शेष है
यदि आज का मनà¥à¤·à¥à¤¯ वासà¥à¤¤à¤µ में अपने मानव जीवन की इस दà¥à¤°à¥à¤²à¤ शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ ता और 84 लाख योनियों के इस विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ को गहराई से समठले, तो वह केवल सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही नहीं बदलता — बलà¥à¤•ि उसका पूरा परिवार, उसका समाज और उसकी आने वाली पीढ़ियाठà¤à¥€ à¤à¤• नई दिशा और नया पà¥à¤°à¤•ाश पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने लगती हैं।
इसलिà¤, हम सà¤à¥€ के पास अà¤à¥€ à¤à¥€ समय है — अपनी इस अंधी दौड़ में थोड़ा ठहरकर आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन करने का, अपनी महान à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• और पौराणिक जड़ों को पहचानने का, और असतà¥à¤¯ के अंधकार को चीरकर सतà¥à¤¯ मारà¥à¤— पर चलने का अदमà¥à¤¯ साहस करने का।
दैनिक आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• चिंतन से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡à¤‚
यदि यह वैचारिक संदेश आपके à¤à¥€à¤¤à¤° सतà¥à¤¯, विवेक और आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन का कोई à¤à¤¾à¤µ जगा सका है, तो इसे केवल पढ़कर à¤à¥‚ल न जाà¤à¤à¥¤ इसे अपने दैनिक जीवन और आचरण में उतारने का दृढ़ संकलà¥à¤ª लें।
समाज के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को चाहिठकि वह à¤à¤¸à¥‡ सतत आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ चरितà¥à¤°-निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करने वाले विचारों से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को जोड़े, जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ को उसकी सनातन जड़ों, उसके संसà¥à¤•ारों और à¤à¤—वदà¥à¤—ीता के सतà¥à¤¯ मारà¥à¤— से जोड़ते हैं।
नितà¥à¤¯ à¤à¤—वदà¥à¤—ीता पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤°à¥€ हेतà¥:
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लेखक परिचय
✠के. कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ सामाजिक चिंतक
शà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤® वृनà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤¨ (à¤à¤¾à¤°à¤¤)
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Original Author: K. Krishnamurti
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