क्या हर श्वास श्री हरि के स्मरण से जुड़ सकती है?
जब जीवन का प्रत्येक कर्म भगवान को समर्पित हो जाता है, तब भक्ति सहज हो जाती है। भगवद्गीता का यही सरल संदेश है—
“यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्।
यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्॥” (9.27)
अर्थात—जो कुछ भी हम करें, उसे ईश्वर को अर्पित कर दें—यही जीवन को सफल बनाने का मार्ग है।
🌎 यदि यह संदेश आपके भीतर जागरण की भावना उत्पन्न करता है, तो आइए—आध्यात्मिक, सामाजिक और प्रेरणादायक विचारों के इस सतत प्रवाह से जुड़ें, तथा नित्य भगवद्गीता प्रश्नोत्तरी में सहभागी बनें —
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